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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को कहा कि जीएसटी सभी पार्टियों का सामूहिक निर्णय था और राज्य सरकार व उसके बाद केंद्र इसका निर्णय लेने की प्रक्रिया में मामूली हिस्सा थे. पार्टी कार्यकर्ताओं की रैली को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, गुजरात में कांग्रेस समेत सभी राजनीतिक पार्टियों ने जीएसटी लाने का निर्णय लिया था। आप सभी इस निर्णय के साझेदार हैं.

प्रधानमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार पूरे जीएसटी काउंसिल का केवल 30वां भाग है. उन्होंने कहा कि इस नए कर प्रावधान के अंतर्गत उत्पन्न समस्याओं को सुलझाना केवल उनके कार्यालय पर नहीं छोड़ा जा सकता.

मोदी ने कहा, मैंने कहा यह नया कर प्रावधान है और मैं प्रत्येक तीन महीने बाद इसकी समीक्षा करूंगा. न केवल हम इसकी समीक्षा कर रहे हैं, बल्कि इससे उत्पन्न सभी समस्याओं का समाधान करने का प्रयास कर रहे हैं. मैं सभी व्यापारी समुदायों को आश्वस्त करता हूं कि सरकार इसके लिए प्रतिबद्ध है कि नई कर प्रणाली से आपलोगों को कोई समस्या न हो.

प्रधानमंत्री ने कहा कि हजारों व्यापारी नए जीएसटी प्रावधान में शामिल हुए हैं, लेकिन वे इसमें सरलीकरण चाहते हैं. मैंने उन्हें आश्वासन दिया है कि मैं उन्हें परेशान नहीं होने दूंगा. कोई भी जीएसटी के विरोध में नहीं है, सभी चाहते हैं कि इसके क्रियान्वयन में परेशानी न हो. हम परेशानी समाप्त करने का प्रयास कर रहे हैं और इस संबंध में लगातार सुझाव ले रहे हैं.

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की कार चोरी हो गई है. यह वारदात दोपहर दो बजे दिल्ली सचिवालय भवन के सामने हुई. यह दिल्ली का बेहद सुरक्षित इलाका माना जाता है. बताया जा रहा है कि यह उनकी ब्लू रंग की Wagon R कार थी, जिसका इस्तेमाल वह दिल्ली चुनाव के दौरान खूब करते थे.

उन्होंने कई ऐतिहासिक मौकों पर इस कार का इस्तेमाल किया. दिल्ली के सीएम बनने के बाद पहली बार वह इसी कार से दफ्तर पहुंचे थे. केजरीवाल की कार चोरी की घटना की चर्चा सोशल मीडिया पर भी खूब हो रही है. ट्विटर पर लोग इस घटना पर खूब मजे ले रहे हैं. आप भी पढ़िए आखिर इस मुद्दे पर सोशल मीडिया पर क्या चल रहा है-

एक यूजर ने लिखा, केजरीवाल की कार उनके साथ चोरी हुई या उनके बिना? अगर उनके बिना कार चोरी हुई तो चोर से मेरी विनती है कि ऐसी गलती दोबारा न करे!
Has Kejriwal's car been stolen with him or without him? If it's without him then my request to thief is not to make same mistake again !



दूसरे ट्विटर यूजर ने लिखा है, केजरीवाल की कार ज्यादा दूर नहीं गई होगी. चोरों को ये नहीं पता कि उनकी कार रायते से चलती है न कि पेट्रोल से.
Kejriwal's car wouldn't go far. The thieves wouldn't know that it runs on Raaita and not petrol. pic.twitter.com/wY11O59jUg



इसके अलावा और भी लोगों ने इस घटना पर मजे लिए-
Delhi CM Kejriwal car stolen from Secretariat.

Only CM in India who could make an Aam Aadmi as a proud owner of Wagon R...😂😂😉


Now that Kejriwal ji has installed CCTVs all over Delhi, each and every movement of CM's car can be tracked.  😍


I think Kejriwal got his own car stolen, to get insurance money. Thats what I think of the joker.



So Kejriwal's car has been stolen.
As winter is approaching god forbid if someone steals his muffler. 

गुजरात चुनाव के मद्देनज़र भारतीय जनता पार्टी गौरव यात्रा निकाल रही है. बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने इसकी शुरुआत की थी,  इस यात्रा का नेतृत्व गुजरात के उपमुख्यमंत्री नितिन पटेल कर रहे हैं. वहीं आज इस यात्रा में शामिल होने के लिए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी शामिल होने सूरत जाएंगे.
बता दें कि 1 अक्टूबर को नितिन पटेल के नेतृत्व में बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने ने सरदार पटेल की जन्मभूमि से गौरव यात्रा को हरी झंडी दिखाई. लेकिन बीजेपी अपने मंसूबे में अभी तक सफल होती नजर नहीं आ रही है. क्योंकि नितिन पटेल को जगह-जगह पटेल समुदाय की नाराजगी का सामना करना पड़ रहा है.

नितिन पटेल के कार्यक्रम का विरोध
मंगलवार को नितिन पटेल के नेतृत्व वाली गौरव यात्रा का 10वां दिन था. गुजरात के पाटन में गौरव यात्रा का बीजेपी कार्यकर्ताओं के द्वारा स्वागत कार्यक्रम रखा गया था. नितिन पटेल  इस कार्यक्रम में 3 घंटे देर से पहुंचे. नितिन पटेल को यात्रा के दौरान चाणस्मा में पाटीदारों के विरोध का सामना करना पड़ा.

गौरव यात्रा के जरिए 149 विधानसभा पर नजर
नितिन पटेल और जीतू वाघाणी के नेतृत्व में निकली दोनों यात्राएं 4700 किमी से अधिक की दूरी तय करेंगी और राज्य के कुल 182 विधानसभा क्षेत्रों में ग्रामीण क्षेत्र की 149 सीटों से होकर गुजरेंगी. इसका समापन 16 अक्टूबर को होगा और पीएम नरेंद्र मोदी सभा को संबोधित करेंगे.

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने आरुषि-हेमराज हत्याकांड मामले में गुरुवार को एक महत्वपूर्ण फैसले में सीबीआई की विशेष अदालत का निर्णय रद्द करते हुए राजेश तलवार और नुपुर तलवार को निर्दोष करार दिया. आज दोनों की रिहाई की होगी.
देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी सीबीआई ने आरुषि केस को कैसे मारा इसे समझने के लिए कुछ सवालों को समझना जरूरी है. सवालों को इसलिए कहा क्योंकि इनके जवाब में सीबीआई शुरू से बस कहानी सुनाती रही. जवाब या सबूत नहीं दे पाई और आखिर में इस पूरे केस में सीबीआई की सबसे कमजोर कड़ियां यही साबित हुईं, जिसका जिक्र अपने फैसले में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने भी किया.
लेकिन अब तक इन सवालों के जवाब नहीं मिले...
- आरुषि के क़त्ल का मक़सद क्या था?
- क्या आरुषि और हेमराज का क़त्ल एक ही कमरे में हुआ?
- दोनों क़त्ल के लिए किस हथियार का इस्तेमाल हुआ?
- क्या हेमराज की लाश छत तक चादर में घसीट कर ले जाई गई?
- आरुषि के कमरे से खून के निशान क्यों नहीं मिले?
- अगर कमरे और चादर साफ किए गए तो गद्दे पर खून के निशान क्यों नहीं मिले?
- क्या गोल्फ स्टिक घुमाने के लिए आरुषि के कमरे में जगह थी?
- क्या गोल्फ स्टिक से इतना गहरा घाव हो सकता है?
- हेमराज के कमरे में शराब की बोतल और तीन ग्लास का राज़ क्या है?
- जिस कूलर के पैनल से छत पर हेमराज की लाश ढकी गई वो पैनल कहां है?
तलवार दंपत्ति ने ये तमाम सवाल सीबीआई की विशेष अदालत में तब भी उठाए थे और सीबीआई की जांच पर तब भी उंगली उठी थी. आसान तरीके से समझाने के लिए आइए अब आपको इन सवालों के ही ज़रिए तलवार दंपत्ति के वकीलों के उठाए सवाल सुनाते हैं, जो सीधे सीबीआई की जांच पर उगली उठाते हैं.
सवाल नंबर-1
आरुषि के बेड या तकिए पर हेमराज के खून के निशान नहीं मिले, यानी हेमराज को आरुषि के कमरे में नहीं मारा गया?
सवाल नंबर-2
सीढ़ियों पर मिले खून के निशान से बस यही पता लगा कि हेमराज को कहीं और मारा गया, लेकिन कहां नहीं मालूम?
सवाल नंबर-3
क्या हेमराज की लाश दो लोग छत तक घसीट कर ले जा सकते थे?
सवाल नंबर-4
डाक्टर तलवार के कपड़ों पर सिर्फ आरुषि के खून के निशान मिले, हेमराज के नहीं?
सवाल नंबर-5
आरुषि या हेमराज को अगर अचानक मारा गया तो उसकी क्या वजह थी?
सवाल नंबर-6
आला-ए-क़त्ल अभी तक बरामद नहीं हुआ?
सवाल नंबर-7
खाने के टेबुल से बरामद स्कॉच की बोतल पर जो उंगलियों के निशान मिले उनकी पहचान नहीं हो पाई?
सवाल नंबर-8
कॉलोनी का गार्ड रात को गश्त पर होता है. लिहाजा आने-जाने वालों के बारे में उसका बयान भरोसे लायक नहीं है?
सवाल नंबर-9
डाक्टर राजेश और नुपुर तलवार पर किए गए साइंटिफिक टेस्ट से उनके खिलाफ कोई सबूत नहीं मिला?
सवाल नंबर-10
तलवार दंपत्ति आरोपी हैं या पीड़ित?
इसके अलावा केस में जो सबसे कमज़ोर कड़ी रही वो ये कि सीबीआई आखिर तक ये साबित नहीं कर पाई कि 15-16 मई की रात जलवायु विहार के फ्लैट नंबर एल-32 यानी डाक्टर तलवार के घर सर्फ चार लोग ही थे. दो जिंदा यानी डाक्टर राजेश और नुपुर तलवार और दो मुर्दा यानी आरुषि और हेमराज. उस रात घर से बाहर कोई निकला या घर के अंदर कोई और आया इसका ना कोई सबूत है ना गवाह.

बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में छात्राओं पर लाठीचार्ज मामले में वाइस चांसलर गिरीश चंद्र त्रिपाठी पर गाज गिरी है. सूत्रों के अनुसार उनके सारे अधिकार अग्र‍िम आदेश तक सीज कर दिए गए हैं. वहीं विश्वविद्यालय के चीफ प्रॉक्टर ओंकारनाथ सिंह ने इस पूरे मामले की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पद इस्तीफे की पेशकश की है.
गिरीश चंद्र त्रिपाठी 26 नवंबर को विश्वविद्यालय के कुलपति पद से रिटायर हो रहे हैं. ऐसे में सूत्रों ने बताया कि वह फिलहाल अपने पद पर बने रहेंगे. दरअसल मंगलवार को कमिश्नर ने अपनी रिपोर्ट शासन को सौंपी, जिसमें इस पूरे मामले में उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया. कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी दलों ने कुलपति को तत्काल हटाने की मांग की है.
वाराणसी के कमिश्नर नितिन गोकर्ण ने मुख्य सचिव राजीव कुमार को अपनी रिपोर्ट सौंप दी. रिपोर्ट में उन्होंने विश्वविद्यालय के प्रशासन को दोषी ठहराया है. इस बीच बीएयचू प्रशासन ने इस पूरे मामले की न्यायिक जांच कराने का फैसला किया है.
शासन से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, गोकर्ण ने अपनी रिपोर्ट मुख्य सचिव को भेज दी है. रिपोर्ट में कहा गया है कि बीएचयू प्रशासन ने पीड़िता की शिकायत पर संवेदनशील तरीके से गौर नहीं किया और वक्त रहते इसका समाधान नहीं किया गया. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अगर वक्त रहते इस मामले को सुलझा लिया गया होता, तो इतना बड़ा विवाद खड़ा नहीं होता.
इस बीच, कुलपति गिरीश चंद्र त्रिपाठी ने अपने बचाव में कहा कि कार्रवाई उन लोगों पर की गई, जो विश्वविद्यालय की संपत्ति को आग लगा रहे थे. उन्होंने एक समाचार चैनल से बातचीत में छात्राओं पर हुए लाठीचार्ज और परिसर में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम न होने की बात को झुठलाते कहा कि प्रधानमंत्री के दौरे को प्रभावित करने के लिए 'बाहरी तत्वों' ने कैम्पस का माहौल बिगाड़ा.
उन्होंने कहा कि कुछ लोग कैम्पस में पेट्रोल बम फेंक रहे थे, पत्थरबाजी कर रहे थे. किसी भी छात्रा पर कोई कार्रवाई नहीं की गई. कार्रवाई का एक भी प्रमाण नहीं है. कुलपति ने कहा, "23 सितंबर की रात लगभग 8.30 बजे जब मैं छात्राओं से मिलने त्रिवेणी छात्रावास जा रहा था, उस समय अराजक तत्वों ने मुझे रोककर आगजनी और पत्थरबाजी शुरू कर दी."
कुलपति ने कहा कि पीड़ित छात्रा और उसकी सहेलियों के साथ उन्होंने दो बार मुलाकात की. छात्राओं ने उन्हें बताया था कि धरने का संचालन खतरनाक किस्म के अपरिचित लोग कर रहे हैं. उन लोगों ने पीड़ित छात्रा को धरना स्थल पर बंधक बनाकर जबरन बिठाए रखा था. पुलिस ने ऐसे तत्वों को कैम्पस से बाहर करने के लिए ही बल प्रयोग किया.
जन्मदिन पर मां का आशीर्वाद लेने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी.. गुजरात के 56 साल लंबे इंतजार को पूरा करेंगे और सरदार सरोवर बांध का उद्घाटन करेंगे. इस बांध से गुजरात के बड़े इलाके में किसानों को सिंचाई के लिए पानी मिलेगा. बांध से बिजली उत्पादन में भी बढ़ोत्तरी होगी. पीएम मोदी के हाथों बांध के 30 गेट खुलेंगे तो पानी गुजरात में उम्मीदों की धारा लेकर बढ़ेगा और मध्य प्रदेश के सैंकड़ों गांव... अपने अस्तित्व के मिट जाने की तैयारी कर रहे होंगे.
नर्मदा नदी पर बनकर तैयार यह बांध दुनिया में दूसरे नंबर का और अपने देश का सबसे ऊंचा बांध है. बांध की ऊंचाई 138 मीटर है और इस ऊंचाई को पाने में सरदार सरोवर ने 56 साल के विवादों का लंबा सफर तय किया है.
सैकड़ों गांवों के गुम हो जाने की दर्दनाक हकीकत
दूसरी ओर इस बांध के साथ जुड़ा है सूखे से हरे होने का सपना और सैंकड़ों गांवों के गुम होने जाने की दर्दनाक हकीकत. सरदार सरोवर के साथ राजनीति के लंबे दांवपेंच भी चले. मामला कोर्ट तक पहुंचा. बरसों तक डूब में आने वाले गांव के लोगों ने जल सत्याग्रह किया और इन सबके साथ बांध का काम रुक-रुक कर आगे बढ़ता रहा.
56 साल बाद सरदार सरोवर बांध अपनी पूरी क्षमता के साथ पानी और बिजली देने के लिए तैयार है. गुजरात के लिए ये मौका बेहद खास है और इसलिए उद्घाटन की पूर्व संध्या को भी यादगार बनाने की पूरी तैयारी की गई. लेजर की रंग बिरंगी रोशनी से बांध के 30 गेटों को सजाया गया. रौशनी से नर्मदा के 30 गेटों पर तरह - तरह की कलाकृतियां बन रही थी.
सरदार पटेल का था सपना
सरदार सरोवर बांध का उद्घाटन देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों होना है, तो इसकी तैयारियां भी कई दिनों से चल रही हैं. बांध के इस पूरे इलाके पर केसरिया रंग का ताना बाना बिखरा है. यहां सरदार पटेल की मूर्ति भी रखी गयी है. ये प्रोजेक्ट सरदार वल्लभ भाई पटेल का सपना था कि गुजरात का किसान पानी की किल्लत की वजह से अपनी पूरी फसल नही ले पाता है, उसे इस बांध से फायदा मिले.
गुजरात को मिलेगा 40 फीसदी ज्यादा बिजली
138 मीटर ऊंचे सरदार सरोवर बांध की जल भंडारण क्षमता अब 4,25,780 करोड़ लीटर हो चुकी है. ये पानी पहले बह कर समुद्र में चला जाया करता था.
2016-17 के दौरान बांध से 320 करोड़ यूनिट बिजली पैदा की गई. अब ज्यादा पानी जमा होने से 40 फीसदी ज्यादा बिजली पैदा की जा सकती है. सरदार सरोवर डैम से बनी बिजली का 57 फीसदी महाराष्ट्र को, 27 फीसदी मध्य प्रदेश को और 16 फीसदी गुजरात को मिलेगा.
महाराष्ट्र, राजस्थान और गुजरात को मिलेगा फायदा
बांध से गुजरात के हजारों गांवों के साथ महाराष्ट्र के 37, 500 हेक्टेयर इलाके तक सिंचाई की सुविधा होगी. राजस्थान के दो सूखा प्रभावित जिले जालौर और बाड़मेर तक 2,46,000 हेक्टेयर जमीन की प्यास बुझेगी. गुजरात के 9,633 गांवों तक पीने का पानी पहुंचेगा. यानी सरदार सरोवर बांध से गुजरात के साथ महाराष्ट्र, राजस्थान और मध्य प्रदेश को फायदा मिलने वाला है.
1961 में रखी गई थी बांध की आधारशिला
नर्मदा कंट्रोल अथॉरिटी ने 16 जून को डैम के सभी गेट बंद करने आदेश दिया और बांध में जल का भराव 121.92 मीटर से बढ़ाकर 138 मीटर कर दिया गया. इससे बांध की स्टोरेज क्षमता 1.27 मिलियन क्यूबिक मीटर से बढ़कर 4.73 मिलियन क्यूबिक मीटर हो गई.
बांध की आधारशिला 1961 में रखी गई और इसके निर्माण की शुरुआत 1987 में हुई. अधिकारियों ने बताया कि मुख्य और सब कैनाल नेटवर्क का काम पूरा हो गया है. लेकिन छोटे-छोटे कैनालों का 30 प्रतिशत काम अभी किया जाना है. बांध को बनाने में जितना कंक्रीट लगा है, उसके मुताबिक यह सबसे बड़ा बांध है. अमेरिका के ग्रैंड कौली डैम के बाद यह दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा बांध है.

बांध को बंद करने में लगता है एक घंटे का समय
1.2 किलोमीटर लंबा बांध 163 मीटर गहरा है. बांध के दो पावर हाउसों बेड पावर हाउस और कैनाल हेड पावर हाउस की क्षमता क्रमशः 1,200 मेगावॉट और 250 मेगावॉट है. सरदार सरोवर बांध से अब तक 16,000 करोड़ से ज्यादा की कमाई हो चुकी है, जो कि इसकी लागत का दो गुना है. डैम का हर एक गेट करीब 450 टन का है और इसे बंद करने में करीब एक घंटे का समय लगता है.
सौ से ज्यादा गांवों का मिट जाएगा अस्तित्व
हालांकि सरदार सरोवर बांध से विवादों का भी नाता है और इसके पीछे वो हजारों लोग हैं, जिनके गांव का अस्तित्व सरदार सरोवर बांध में हमेशा के लिए गुम हो जाएगा. बांध के 30 गेट के खुलते ही मध्य प्रदेश के 192 गांव, महाराष्ट्र के 33 और गुजरात के 19 गांव नक्शे से मिट जाएंगे.
अदालत और राजनीतिक विवादों से गुजरते हुए मुकाम तक पहुंचे सरदार सरोवर बांध को पीएम नरेंद्र मोदी अपने जन्मदिन पर लोकार्पित कर रहे हैं. गुजरात में जश्न है तो मध्य प्रदेश में मायूसी.. देश के सबसे ऊंचे बांध का पहला पन्ना.. स्वागत और विरोध के दो सुरों के साथ ही लिखा जाना है.