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अमेरिकी रक्षा मंत्री जिम मैटिस अपने तीन दिवसीय भारत दौरे पर हैं. मंगलवार को मैटिस ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण के अलावा कुछ अन्य भारतीय अधिकारियों से मुलाकात की. इस दौरान उन्होंने भारत और अमेरिका के बीच सामरिक संबंधों को और अधिक मजबूत करने पर जोर दिया. मुलाकात के दौरान अमेरिका द्वारा भारत को फाइटर जेट और सर्विलांस ड्रोने बेचे जाने की बात भी की गई.
गौरतलब है कि दक्षिण एशिया में लगातार बढ़ रहे चीन के प्रभाव के चलते ही अमेरिका फिलहाल भारत के साथ अपने सामरिक संबंध मजबूत करने की कोशिश कर रहा है. यही वजह है कि अमेरिका में ट्रंप के सत्तारूढ़ होने के बाद मैटिस ट्रंप कैबिनेट के पहले शख्स हैं जो भारत दौरे पर आए हैं. मैटिस की भारतीय अधिकारियों के साथ हुई बातचीत के टॉप एजेंडे में 22 सी गार्जियन ड्रोन एयरक्राफ्ट की सप्लाई भी शामिल है. गौरतलब है कि ट्रंप सरकार ने जून में ही भारतीय नौसेना के लिए इस सर्विलांस ड्रोन की डील को अपनी अनुमति दी है. खास बात ये है कि ऐसा पहली बार हुआ है जब गैर नाटो सदस्य मुल्क के लिए अमेरिकी सरकार ने इसकी सप्लाई की अनुमति दी है.
चीन की पनडुब्बियां और समुद्री जहाज नियमित तौर पर हिंद महासागर का चक्कर लगाते रहते हैं. इस वजह से भारतीय नौसेना ने हिंद महासागर के सर्विलांस के लिए मानवरहित ड्रोन की मांग की थी. इधर अमेरिका दक्षिण चीन महासागर में चीन की बढ़ती सामरिक ताकत को लेकर भी चिंतित है. अमेरिका ने भारतीय नौसेना के साथ इस इलाके में जॉइंट पेट्रोलिंग का प्रस्ताव दिया था जिसे भारत ने ठुकरा दिया था.
इसके अलावा भारत और अमेरिका के बीच लॉकहीड मार्टिन कंपनी की तरफ से भारत में F-16 फाइटर प्लेन बनाने की पेशकश पर भी बात भी की जाएगी. बता दें कि कंपनी ने यह पेशकश प्रधानमंत्री मोदी के 'मेक इन इंडिया' कैंपेन के तहत भारत में घरेलू सैन्य औद्योगिक आधार बनाने के लिए दिया है.
इस बारे में अमेरिकी रक्षा मंत्री मैटिस ने कहा, "हम अपनी सबसे उन्नत रक्षा तकनीकों को साझा करने के लिए उत्सुक हैं." यहां आपको यह भी बता दें कि पिछले कुछ सालों में भारत और अमेरिका के संबंधों में काफी प्रगति देखी गई है. इस दौरान भारत ने अमेरिका से 15 अरब डॉलर से अधिक के हथियार भी खरीदे हैं.

ट्रंप प्रशासन को इस बात की चिंता है कि पाकिस्तान के परमाणु हथियार और सामग्री कहीं आतंकी समूहों के हाथ न लग जाएं. सामरिक हथियारों के विकास के साथ साथ यह चिंता और गहरी हो गई है. यह बात अमेरिका के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कही है.

ट्रंप प्रशासन के इस वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि व्यापक समीक्षा के दौरान एक सबसे बड़ा मुद्दा क्षेत्र में पनप रहा परमाणु हथियारों से जुड़ा खतरा है जो लगातार चर्चा का विषय बना रहा और अमेरिका के लिए बहुत महत्वपूर्ण है.

सम्मेलन के दौरान अधिकारी ने संवाददाताओं से कहा कि यह मामला दक्षिण एशियाई रणनीति का बेहद संवेदनशील हिस्सा है.

अपना नाम गुप्त रखते हुए इस वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी ने कहा कि ट्रंप सरकार इस बात को लेकर चिंतित है कि पाकिस्तान में परमाणु हथियार और सामग्री आतंकी समूहों या लोगों के हाथ लग सकती हैं.
अधिकारी ने बताया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा सोमवार को घोषित की गई दक्षिण एशिया रणनीति में इस बात का जिक्र किया गया था कि 'परमाणु हथियार या उपकरण गलत हाथों में पड़ सकते हैं.' उन्होंने बताया कि इन्हीं खतरों के कारण इन नीतियों में भारत और पाकिस्तान की आपसी बातचीत पर जोर दिया गया है.

अमेरिका ने एक बार फिर पाकिस्तान को आतंकवाद के खिलाफ कड़े कदम उठाने का संदेश दिया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर जहां भारत के साथ रिश्तों को मजबूत करने की बात कही तो दूसरी ओर अफगानिस्तान की अभी और मदद का आश्वासन भी दिया. भारतीय प्रधानमंत्री और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की दोस्ती का असर अब साफ दिखने लगा है, जिसकी वजह से पाकिस्तान और चीन की मुश्किल बढ़ गई है.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को अपने संबोधन में पाकिस्तान को स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि पाकिस्तान आतंकवाद के खिलाफ लड़ने की अपनी प्रतिबद्धता को अमली जामा पहना कर दिखाए. वहीं इसके साथ अमेरिका के राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि अमेरिकी लोग बिना विजय के ही युद्ध से थक चुके हैं.
पाकिस्तान पर कड़ा रुख अख्तियार करते हुए ट्रंप ने कहा, "एक ओर पाकिस्तानी नागरिक आतंकवाद झेल रहे हैं. लेकिन उसी समय पाकिस्तान आतंकवादियों के लिए सुरक्षित स्वर्ग बना हुआ है."
अफगानिस्तान पर अपनी नीति स्पष्ट करते हुए ट्रंप ने कहा कि हम भारत के साथ गहरे कुटनीतिक संबंध बनाने के साथ अफगानिस्तान की अत्यधिक मदद करेंगे. उन्होंने आगे कहा कि भारत ने अमेरिका के साथ व्यापार में अरबों डॉलर बनाए हैं. अब हम उनसे चाहते हैं कि वे अफगानिस्तान में हमारी मदद करें.
अफगानिस्तान पर बोलते हुए ट्रंप ने कहा हम इराक में अपने पूर्व नेताओं द्वारा की गई गलतियों को नहीं दोहराने वाले. आतंकवादी सिर्फ ठग, अपराधी और दरिंदे हैं. जल्दबाजी में निकल जाने पर एक वैक्यूम बनेगा जिसे ISIS और अलकायदा तेजी से भरेंगे. जिस तरह यह 11 सितंबर से पहले हुआ था.
 ट्रंप ने आगे कहा, "पाकिस्तान अफगानिस्तान में हमारे प्रयासों की मदद से काफी लाभ कमा सकता है."
पाकिस्तान पर सख्त हो चुका है अमेरिका
अमेरिकी सरकार पहले ही पाकिस्तान को दुनिया भर में दहशतगर्दी और आतंक फैलाने के लिए जिम्मेदार ठहरा चुकी है. वह पाकिस्तान को आतंकवाद पर दोगली नीति खत्म करने की कई बार चेतावनी दे चुकी है. अमेरिका ने पाकिस्तान को आतंक की फसल उगाने वाले देशों की सूची में डाल दिया है. अमेरिका की इस कार्रवाई के बाद पाकिस्तान अंतराष्ट्रीय मंच पर बेनकाब हुआ है. अभी कुछ हफ्ते पहले एक आतंकी संगठन के सरगना सैयद सलाउद्दीन को अमेरिका ने ग्लोबल आतंकी घोषित किया था. इसके साथ ही अमेरिका की तरफ से मिलने वाली आर्थिक मदद पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया है. हाफिज सईद को अमेरिका पहले ही वैश्विक आतंकवादी घोषित कर चुका है.
डोकलाम विवाद को लेकर को अब चीन की मीडिया ने भी भारत पर निशाना साधना शुरू कर दिया है. चीन की वेबसाइट ग्‍लोबल टाइम्‍स की एक रिपोर्ट में भारत पर आरोप लगाया गया कि उसने डोकलाम विवाद को जन्‍म दिया और चीन की सीमा में घुसकर अपनी सैन्‍य उपस्थिति बढ़ा रहा है. ग्‍लोबल टाइम्‍स के अनुसार भारत ऐसा दक्षिण एशिया में अपना प्रभाव बनाए रखने के लिए कर रहा है. रिपोर्ट के अनुसार इस मुद्दे को लेकर मोदी सरकार की आक्रामकता से यह बात साफ है कि भारत चीन के साथ कूटनीतिक विरोध को बढ़ाना चाह रहा है.
पाकिस्‍तान से दोस्‍ती की बात स्‍वीकारी
मीडिया रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि चीन पाकिस्‍तान के दोस्‍ती को बढ़ावा दे रहा है और चीन-पाकिस्‍तान इकनॉमिक कॉरिडोर की वजह से उनके रिश्‍ते और मजबूत हुए हैं. सिर्फ  ही नहीं चीन ने नेपाल, श्रीलंका, मालदीव और दक्षिण एशिया के दूसरे देशों से भी अपने रिश्‍तों में सुधार किया है. रिपोर्ट में कहा गया कि मोदी से पहले भारत की आर्थिक और राष्ट्रीय शक्ति में तेजी से विकास हुआ. हालांकि चीन की शक्‍ति इस दौरान और तेजी से बढ़ी है. अब चीन तीव्रता से दक्षिण एशिया में अपना प्रभाव बढ़ा रहा है और यही बात भारत को परेशान कर रही है.
खटकी अमेरिका से दोस्‍ती
चीन की मीडिया रिपोर्ट के अनुसार भारत चीन और अमेरिका के टकराव का फायदा उठा रहा है. रिपोर्ट में कहा गया कि भारत अपनी बढ़ती आर्थिक शक्‍ति की वजह से बीजिंग और नई दिल्‍ली के द्विपक्षीय रिश्‍तों में खटास डाल रहा है और इस क्षेत्र में बढ़ रहे चीन के दबदबे को रोकने की कोशिश कर रहा है. रिपोर्ट के अनुसार यही वजह है कि चीन सरकार के साथ कुछ दिन की दोस्‍ती कर अब पीएम नरेंद्र मोदी दोनों देशों को विवाद में झोंक रहे हैं.
यही नहीं रिपोर्ट में साफ कहा गया कि भारत अकेले चीन को नहीं रोक सकता. यही वजह है कि वह अब अमेरिका और जापान की मदद लेने की कोशिश कर रहा है. रिपोर्ट में डोकलाम विवाद के समय पर भी सवाल उठा गया. कहा गया है कि मोदी के अमेरिका दौरे से लौटने और उसके बाद डोकलाम विवाद शुरू होना महज संयोग नहीं है. भारत अमेरिका की उस कूटनीतिक लालसा का फायदा उठाना चाह रहा है, जिसके अनुसार वॉशिंगटन भारत का इस्‍तेमाल चीन को कंट्रोल और चेक करने के लिए करना चाहता है. वहीं जापान के साथ मालाबार ड्रिल,  न्‍यूक्लियर और सैन्‍य संबंध बढ़ाना भी भारत की कूटनीतिक सोच ही है.
राजनैतिक हालात पर भी टिप्‍पणी
रिपोर्ट में हमारे देश की राजनीतिक हालात पर भी विपरीत टिप्‍पणी की गई है. कहा गया कि भारत के वर्तमान राजनीतिक माहौल में चीन के साथ दोस्‍ती को बढ़ावा देने की जगह मुकाबला करना आसान है. ऐसे में मोदी सरकार ने भी चीन के साथ मुकाबला करने का निर्णय लिया, जिससे कि वह दक्षिण एशिया में अपना प्रभाव बनाए रख सके.
चीन अब डोकलाम विवाद में भारत पर दबाव बढ़ाने के लिए लद्दाख का रास्ता ले रहा है. इस इलाके में सरहद के नजदीक के चीनी फौजी पुल बनाने की कोशिश में जुटी हैं. दरअसल, डोकलाम पर 55 दिनों से बौखला रहा चीन अब भारत को लद्दाख के रास्ते घेरने की जुगत में लग गया है.

डोकलाम में चीनी फौजें सड़क बनाकर विवादित इलाके की यथास्थिति से छेड़छाड़ करने की साजिश कर रही थीं तो लद्दाख में लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) के पास भी चीनी फौजें ऐसी दादागीरी दिखाने पर उतर आई हैं. नो मैन्स लैंड यानी दोनों देशों के सरहद के बीच भी चीनी फौज अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रही है.

दरअसल जम्मू कश्मीर से लेकर अरुणाचल तक भारत और चीन के 4 हजार किमी से भी लंबे बॉर्डर पर डोकलाम के अलावा भी कई ऐसे पॉइंट हैं, जहां दोनों देशों के बीच सीमा विवाद का मसला है. जहां पर कोई विवाद नहीं है वहां भी चीन बेवजह आक्रामक रुख दिखाता रहता है. माना जा रहा है कि डोकलाम पर भारत को दबाव में लाने के लिए चीन नई रणनीति के तहत सीमा के दूसरे बिंदुओं पर दबाव बढ़ा रहा है.

लेकिन चीन शायद भूल गया कि डोकलाम में उसे 55 दिनों से घुटने पर बिठाकर रखने वाली भारतीय फौज लद्दाख में भी उतनी ही मुस्तैद और चौकस है जितनी सरहद के किसी भी हिस्से में. चाहे खून जमा देने वाली ठंड हो या बर्फ की आंधी, यहां सरहद की चौकसी करने वाले भारतीय जवानों के कदम रोक पाना किसी के बस की बात नहीं.

डोकलाम को लेकर भारत पर दबाव बना रहा चीन लद्दाख पर पहले से ही निगाह बनाए हुए है. लद्दाक में एलएसी पर दोनों देशों की सेना के बीच बॉर्डर पर्सनल बैठकें काफी पहले से होती रही हैं लेकिन इस बार चीन ने ये सिलसिला भी रोक दिया है.

दोनों देशों की सेनाओं के बीच ये बैठकें दौलत बेग ओल्डी क्षेत्र में होती थीं. आधी बैठकें भारतीय तो आधी चीनी क्षेत्र में होती थीं. इस बार डोकलाम विवाद के चलते चीनी सेना ने इन बैठकों के लिए कोई पहल नहीं की. लेकिन चीन की इस बेरुखी और दादागीरी से अलग भारतीन जवान सरहद के इस इलाके को हर हालात के लिए तैयार रहने के काबिल बनाने में जुटे हैं.
डोकलाम को लेकर भारत से जारी तनाव के बीच चीन ने कहा कि हमारे बड़े हथियार सिर्फ खिलौने नहीं हैं. चीन ने हालांकि इसके साथ ही कहा कि उसकी नौसेना हिंद महासागर की सुरक्षा बरकरार रखने के लिए भारतीय नेवी से हाथ मिलाना चाहती है.
बता दें कि चीनी नौसेना ने शुक्रवार को भारतीय मीडिया को अपना युद्धपोत यूलिन दिखाया और साथ ही वहां तैनात हथियारों की जानकारी दी. चीन ने तटीय शहर झानजियांग में अपने सामरिक दक्षिण सागर बेड़े (एसएसएफ) के अड्डे को पहली बार भारतीय पत्रकारों के एक समूह के लिए खोला है. इसके साथ ही पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के अधिकारियों ने कहा कि हिंद महासागर अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए एक साझा स्थान है.
बता दें कि दोनों देशों के बीच डोकलाम में करीब दो महीने से तनाव चल रहा है. दोनों देशों की सेनाएं एक-दूसरे के सामने खड़ी है.
हिंद महासागर की सुरक्षा में योगदान
चीन के एसएसएफ के जनरल ऑफिस के उप प्रमुख कैप्टन लियांग तियानजुन ने कहा, 'मेरी राय है कि चीन और भारत हिंद महासागर की संरक्षा एवं सुरक्षा के लिए संयुक्त तौर पर योगदान कर सकते हैं.' उन्होंने यह टिप्पणी ऐसे समय में की जब चीन की नौसेना अपनी वैश्विक पहुंच बढ़ाने के लिए बड़े पैमाने पर विस्तारवादी रवैया अपना रही है.
उन्होंने हिंद महासागर में चीनी युद्धपोतों और पनडुब्बियों की बढ़ती सक्रियता को भी स्पष्ट किया, जहां चीन ने पहली बार 'हॉर्न ऑफ अफ्रीका' में जिबूटी में एक नौसैनिक अड्डा स्थापित किया.
चीन के बढ़ते प्रभाव में आएगी और तेजी
विदेश में चीन के पहले नौसैनिक अड्डे की स्थापना पर हो रही इस आलोचना का जवाब देते हुए कहा कि इससे चीन के बढ़ते प्रभाव में और तेजी आएगी. उन्होंने कहा कि यह एक सुविधा केंद्र के तौर पर काम करेगा. साथ ही समुद्री डकैती के खिलाफ अभियान, संयुक्त राष्ट्र शांतिरक्षा अभियान और क्षेत्र में मानवीय राहत मिशन का समर्थन करेगा.
उन्होंने कहा कि जिबूटी के अड्डे से चीनी नौसैनिकों को आराम करने की भी जगह मिल सकेगी. लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि विदेश में चीन का पहला सैन्य अड्डा स्थापित करना अपनी वैश्विक पहुंच बढ़ाने की पीएलए की महत्वाकांक्षा के अनुसार ही है.
अमेरिकी की चेतावनी के बाद नॉर्थ कोरिया ने अमेरिका के प्रशांत क्षेत्र के गुआम पर मिसाइल हमले की योजना बनाई है। ज्ञातव्य है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नॉर्थ कोरिया को चेतावनी देते हुए कहा था कि अगर उत्तर कोरिया ने अमेरिका को धमकाना जारी रखा तो उसे विध्वंस का सामना पडेगा जो कभी नहीं देखा होगा। इस पर नॉर्थ कोरिया की पीपुल्स आर्मी के प्रवक्ता ने एक बयान में कहा है कि एक बार कि किम जोंग उन ने निर्णय किया है तो किसी भी समय स्ट्राइक को लागू किया जाएगा। साथ ही उन्होंने कहा कि नॉर्थ कोरिया गुआम के आसपास के क्षेत्रों में रणनीतिक बैलिस्टिक रॉकेट ह्वासोंग-12 के साथ अमेरिका के प्रमुख सैन्य ठिकानों को शामिल करने के लिए परिचालन योजना की जांच कर रहा है। 
ट्रंप ने दी थी उत्तर कोरिया को चेतावनी:
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने गोल्फ क्लब में आयोजित एक बैठक में कहा था कि नॉर्थ कोरिया के लिए अच्छा होगा कि अमेरिका को धमकियां ना दें। साथ ही ट्रंप ने कहा था कि अगर नॉर्थ कोरिया ने अमेरिका को धमकी देना जारी रखा तो उसे ऐसे विध्वंस का सामना करना होगा जो दुनिया ने कभी नहीं देखा होगा। ट्रंप ने द वाशिंगटन पोस्ट अखबार द्वारा अमेरिका खुफिया सेवाओं के हवाले से कहा था कि उत्तर कोरिया की किम जोंग-उन सरकार ने एक परमाणु हथियार का निर्माण किया है जो इतना छोटा है कि उसकी मिसाइलों में लगाया जा सकता है। 
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान को आतंकवाद के प्रति रवैया पर सख्त संदेश दिया है. अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहाकार (NSA) जनरल एचआर मैकमास्टर ने पाकिस्तान को ट्रंप का बेहद सख्त संदेश दिया है, जिसमें उन्होंने पाक से कहा है कि वह तालिबान, हक्कानी नेटवर्क और उस जैसे दूसरे आतंकी संगठनों को मदद पहुंचाने की 'दोगली नीति' को बदले, क्योंकि इससे खुद पाक को ही भारी नुकसान हो रहा है.

यूं तो आतंकियों को मदद पहुंचाने के अमेरिकी अधिकारियों के आरोपों का पाकिस्तान पुरजोर ढंग से खंडन करता रहा है, लेकिन यह मौका है अमेरिकी राष्ट्रपति के हवाले से यह बात कही गई है.

पाकिस्तानी अखबार डॉन में छपी खबर के मुताबिक, जनरल मैकमास्टर ने कहा, राष्ट्रपति ट्रंप ने यह भी साफ किया कि अमेरिका इस इलाके में उन लोगों के बर्ताव में बदलाव देखना चाहता है, जो तालिबान, हक्कानी नेटवर्क और दूसरे आतंकी संगठनों को सुरक्षित पनाहगाह और मदद मुहैया करा रहे हैं.'

मैकमास्टर ने साथ ही कहा, 'यहां खासतौर से पाकिस्तान की तरफ इशारा है और हकीकत में हम इन आतंकी संगठनों की मदद में कमी और इसे लेकर पाकिस्तानी की नीति में बदलाव देखना चाहते हैं. मेरा मतलब है, यह बेशक मिथ्याभासी है, जहां पाक को खुद ही भारी नुकसान हो रहा है. वे इन आतंकी संगठनों के खिलाफ कठिन लड़ाई लड़ रहे हैं, लेकिन वह चुनिंदा संगठनों के खिलाफ ही कदम उठा रहा है.'

इस्लामाबाद:-पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को यदि सुप्रीम कोर्ट संवेदनशील पनामा पेपर्स मामले में कथित भ्रष्टाचार एवं धनशोधन के लिए अयोग्य ठहराता है तो उनके छोटे भाई एवं पंजाब प्रांत के मुख्यमंत्री शहबाज शरीफ उनकी जगह ले सकते हैं। एक मीडिया रिपोर्ट में यह बात कही गई है। शहबाज संसद के निचले सदन नेशनल असेम्बली के सदस्य नहीं हैं, इसलिए वह तत्काल उनका स्थान नहीं ले सकते और उन्हें चुनाव लड़ना होगा।
‘जियो न्यूज’ ने सूत्रों का हवाला देते हुए कहा कि शहबाज के उपचुनाव में चुने जाने तक रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के 45 दिनों तक अंतरिम प्रधानमंत्री के तौर पर कार्यभार संभालने की संभावना है। यह निर्णय सत्तारूढ़ पाकिस्तान मुस्लिम लीग नवाज (पीएमएल-एन) की शुक्रवार को हुई उच्च स्तरीय बैठक में लिया गया। बैठक के दौरान यह फैसला किया गया कि यदि निर्णय प्रधानमंत्री के खिलाफ आता है तो पार्टी सभी उपलब्ध कानूनी एवं संवैधानिक विकल्पों का इस्तेमाल करेगी। इस बैठक की अध्यक्षता प्रधानमंत्री शरीफ ने की।

फ्रांस के दौरे पर गए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्रांस की फर्स्ट लेडी ब्रिजीट मैक्रों पर टिप्पणी करते हुए , ब्रिजीट से कहा ‘क्या आप जानती हैं, आपकी शेप कितनी बेहतरीन है. इतना बोलकर वो इमैनुअल मैक्रों की तरफ मुड़े और कहा के आपको नहीं लगता कि ये बहुत सुंदर है?
ट्रम्प ने फर्स्ट लेडी ब्रिजीट मैक्रों के दोनों गालों पर पैरिस स्टाइल में किस किया. ट्रंप काफी देर तक उनके दोनों हाथ पकड़कर खड़े रहे.
इमैनुअल मैक्रों और उनकी पत्नी ब्रिजीट मैक्रों ने फ्रांस में ट्रंप का वेलकम किया। ट्रम्प ने फ्रांस में इमैनुअल मैक्रों से द्विपक्षीय वार्ता की और साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया.
इससे पहले भी ट्रम्प महिलाओ पर टिपण्णी कर चुके है। 2016 के राष्ट्रपति अभियान के दौरान, उन्होंने अपने तत्कालीन विरोधी कार्ली फियोरीना की चेहरे की विशेषताओं की आलोचना की थी. हाल ही में व्हाइट हाउस में ट्रंप एक आयरिश महिला रिपोर्टर की मुस्कान पर फिदा हो गए थे. उन्होंने प्रधान मंत्री लियो वरदकर के साथ ओवल ऑफ़िस से फोन कॉल करके कहा “इनकी मुस्कान अच्छी है, इसलिए मुझे यकीन है कि वह आपके साथ अच्छी तरह से व्यवहार करती है.
जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग में अमरनाथ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं पर हुए आतंकी हमले की हर तरफ निंदा हो रही है. अमेरिका ने भी इसकी निंदा की है, ट्रंप प्रशासन ने कहा है कि कश्मीर में अमरनाथ यात्रा के दौरान हुआ आतंकवादी हमला निंदनीय है. दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग जिले में सोमवार रात हुए आतंकवादी हमले में सात अमरनाथ यात्रियों की मौत हो गई थी और 19 अन्य लोग घायल हुए थे

भारत-चीन के बीच चल रहे तनाव के दौरान चीन ने भारत में रह रहे अपने नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी की है. चीन ने एडवाइजरी में उन्हें  अपनी सुरक्षा को लेकर सचेत रहने को कहा है.
एडवाइजरी एम्बेसी की वेबसाइट पर 7 जुलाई को पोस्ट की गई. एडवाइजरी में भारत में कहा गया कि भारत में रह रहें चीनी लोग अपनी सुरक्षा को लेकर सतर्क रहे. अपनी सुरक्षा जागरूकता में सुधार लाए. सुरक्षा को मजबूत करे, अनावश्यक यात्रा को कम करें, और अपने परिवार, सहकर्मियों को अपनी यात्रा के बारे में सूचित करें. नागरिकों को निजी पहचान रखने और पालन करने के लिए कहा गया.  भारतीय कानूनों और नियमों का  सख्त अनुपालन और सम्मान करें.
नीरज कुमार /खगड़िया (बिहार)


नई दिल्ली - कई अखबारों और सर्वे में ये खुलासा हो चुका है कि हर पाकिस्तानी लड़की के सपनों का राजकुमार एक भारतीय लड़का ही होता है। जानिए क्या है इसकी वजह। इसकी पहली वजह है सास, जहां भारत की अधिकतर मांएं प्यार करने वाली होती हैं वहीं पाकिस्तानी सास किसी इम्तिहान से कम नहीं होतीं। भारत की सास भी कुछ सख्त हो सकती हैं लेकिन क्या आप जानते हैं कि वहां की सास रोज बहू से पैर दबवाना और अपने बेटे के सामने उसे जलील करना अपना अधिकार समझती हैं।

दूसरी वजह है पति का बर्ताव। वहां हर पत्नी का ये फ़र्ज़ है कि अपनी कोई भी समस्या पति को न बताए, वरना वो नाराज़ हो जाएगा।आपका ये फ़र्ज़ बनता है कि अपने पति को खुश रखें, चाहे खुद कितनी भी परेशान रहो। जब पाकिस्तानी लड़कियां भारत की फिल्में देखती हैं और उनमें प्यार करने वाला पति देखती हैं तो उन्हें अपने पाकिस्तानी होने पर पछतावा होता है।

तीसरी वजह है दहेज़। भारत में भी दहेज़ की परंपरा अभी पूरे तौर पर खत्म नहीं हुई लेकिन पाकिस्तान के सामने तो ये कुछ भी नहीं है। वहां इतना दहेज़ देना पड़ता है कि लड़कियां शादी के नाम से ही डर जाती हैं। कई बार तो ऐसा भी होता है कि शादी के कई सालों बाद पति को अपना दहेज़ कम लगा और तलाक देकर पत्नी को बाहर निकाल दिया।

चौथी वजह है फैमिली प्लानिंग। पाकिस्तान में शादी के बाद पत्नी को एक निर्जीव सामान की तरह देखा जाता है, जो केवल बच्चे पैदा करने की मशीन भर है। वहां ये बात आम है कि 25 साल की लड़की 5 बच्चों की मां है।

पांचवी वजह है भारत के लड़कों की शिक्षा और सोच। भारत के नौजवान जहां अमेरिका और कई देशों में जाकर बड़े पदों पर काम करते हैं, वहीं एक पाकिस्तानी या तो किसी के घर नौकर बनेगा या फिर टैक्सी चलाएगा। विभिन्न आतंकी हमलों के बाद कई देश पाकिस्तानियों को वीजा देने में भी बहुत आनाकानी करने लगे हैं। जिस किसी के पास पाकिस्तान का पासपोर्ट होता है, उसे सुरक्षा एजेंसियां शक की निगाह से देखती हैं। यही वजह है कि विदेश में रहने वाली अधिकतर पाकिस्तानी लड़कियां भारतीय लड़कों को अपना दिल दे बैठती हैं।
पाकिस्तान शुक्रवार को तीन बम धमाकों से दहल गया. पहला आत्मघाती बम धमाका क्वेटा के गुलिस्तान रोड इलाके और दो धमाके पाकिस्तान के संघीय प्रशासित आदिवासी क्षेत्र कुर्रम एजेंसी के पारचिनारक इलाके में हुए, जिसमें कम से कम 38 लोगों की मौत हो गई, जबकि 120 से ज्यादा लोग घायल हो गए. यह शिया बहुल इलाका माना जाता है. 
पाकिस्तानी अखबार डॉन ने स्थानीय अधिकारियों के हवाले से बताया कि ये धमाके बेहद घनी आबादी वालेक क्षेत्र में किए गए. मृतकों और घायलों की संख्या में इजाफा हो सकता है. फिलहाल हमले की जिम्मेदारी किसी आतंकी संगठन ने नहीं ली है. इस घटना के बाद इलाके में राहत एवं बचाव शुरू कर दिया गया है. घायलों को पारचिनार के डिस्ट्रिक्ट जनरल हॉस्पिटल में भर्ती कराया जा रहा है. 
हॉस्पिटल के चिकित्सा अधीक्षक सबीर हुसैन ने बताया कि पारचिनार के तूरी बाजार और ताल अड्डा में हुए धमाकों में कम से कम 25 लोगों की जान गई है, जबकि 100 से ज्यादा लोग जख्मी हुए हैं. अस्पतालों में आपातकाल लागू कर दिया गया है, ताकि लोगों का तेजी से इलाज किया जा सके. पहला धमाका ताल अड्डा के नजदीक किए गए, जहां पर बाजार और बस टर्मनिल भी हैं. इसके अलावा दूसरा धामाका उस वक्त हुआ, जब घायलों को अस्पताल लाया जा रहा था.
भारत ने देश में ही बने पृथ्वी 2 मिसाइल का सफल परीक्षण किया. ओडिशा के चांदीपुर टेस्ट रेंज से शुक्रवार सुबह 9.56 बजे मोबाइल लॉन्चर के जरिये फायर की गईं पृथ्वी 2 मिसाइलें परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम हैं.

आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि जमीन से जमीन पर मार करने वाली इस मिसाइल का रेंज 350 किलोमीटर तक है. उन्होंने कहा कि इस बहुत ही एडवांस मिसाइल का परीक्षण सफल रहा और मिशन के लक्ष्य पूरे हुए.

पृथ्वी-2 मिसाइल में 2 प्रोपेलर इंजन लगे हैं और यह 500 से 1000 किलोग्राम वजनी आयुध ले जाने में सक्षम है. यह अपने लक्ष्य को सटीकता से निशाना बनाने के लिए अत्याधुनिक प्रणाली का इस्तेमाल करती है.

इससे पहले 21 नवंबर 2016 को इसी जगह से दो पृथ्वी 2 मिसाइलों का एक के बाद एक परीक्षण किया गया था. इस 9 मीटर लंबी मिसाइल को वर्ष 2003 में भारतीय सशस्त्र बल में शामिल किया गया था. यह पहली ऐसी मिसाइल है, जिसे डीआरडीओ ने इंटीग्रेटेड गाइडिड मिसाइल डिवलपमेंट प्रोग्राम के तहत विकसित किया है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत और जर्मनी के आर्थिक संबंधों में बड़ी छलांग की पैरवी की है. उन्होंने जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल के साथ बैठक के बाद संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में यह बात कही. इससे पहले दोनों नेताओं ने व्यापार, कौशल विकास, साइबर सुरक्षा और आतंकवाद जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की.

संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में मोदी ने कहा, 'हमारे रिश्तों के विकास की गति तेज है. दिशा सकारात्मक और मंजिल स्पष्ट है. जर्मनी भारत को हमेशा एक शक्तिशाली, तैयार और सक्षम साझेदार के रूप में पाएगा.'

उन्होंने कहा, 'हम भारत-जर्मनी के संबंधों में परिणाम लाने वाली गति और खासकर आर्थिक संबंधों में बड़े उछाल की तरफ देख रहे हैं. आज हमारे बीच व्यापक चर्चा हुई. भारत-जर्मनी साझेदारी से हमारे साथ ही अन्य देशों को भी मदद मिलेगी.'

इस दौरान मर्केल ने कहा कि भारत एक भरोसेमंद साझेदार साबित हुआ है. दोनों पक्ष सहयोग गहरा बनाने में सक्षम हुए हैं.